1,000 नई शुरुआत: DKMS–संकल्प साझेदारी ने थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों को दी नई उम्मीद

संकल्प इंडिया फाउंडेशन ने बच्चों के 1,000 स्टेम सेल ट्रांसप्लांट पूरे किए; 5 सितंबर को बेंगलुरु में मनाया जाएगा ऐतिहासिक पड़ाव



Bangalore, 4 September , 2026: थैलेसीमिया सहित गंभीर आनुवंशिक रक्त विकारों से जूझ रहे बच्चों के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए संकल्प इंडिया फाउंडेशन ने सफलतापूर्वक 1,000 बाल स्टेम सेल प्रत्यारोपण पूरे कर लिए हैं।

इस उपलब्धि ने सैकड़ों परिवारों के लिए नई उम्मीद जगाई है। “1,000 नई शुरुआत” विषय के तहत इस ऐतिहासिक पड़ाव का उत्सव 5 सितंबर को बेंगलुरु में मनाया जाएगा।

यह उपलब्धि संकल्प इंडिया फाउंडेशन, अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था DKMS और चिकित्सा एवं ज्ञान साझेदार क्योर2चिल्ड्रन फाउंडेशन के बीच एक दशक से अधिक समय से जारी साझेदारी का महत्वपूर्ण परिणाम है।

गंभीर थैलेसीमिया से पीड़ित कई बच्चों के लिए स्टेम सेल प्रत्यारोपण नियमित रक्त चढ़ाने और आजीवन उपचार पर निर्भरता से आगे बढ़कर एक स्वस्थ भविष्य की संभावना प्रदान करता है।

820 से अधिक बच्चों के उपचार में DKMS का सहयोग

संकल्प इंडिया फाउंडेशन द्वारा किए गए 1,000 प्रत्यारोपणों में से 820 से अधिक बच्चों के प्रत्यारोपण उपचार खर्च में DKMS ने सहयोग किया है।

वर्षों के दौरान यह साझेदारी केवल व्यक्तिगत प्रत्यारोपणों के लिए वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रही। आज यह व्यापक थैलेसीमिया देखभाल, प्रत्यारोपण बुनियादी ढांचे, निदान, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और चिकित्सा अनुसंधान तक विस्तृत हो चुकी है।

DKMS की ग्लोबल सीईओ डॉ. एल्के न्यूजाहर ने कहा कि यह उपलब्धि दीर्घकालिक सहयोग की शक्ति को दर्शाती है।

“1,000 प्रत्यारोपण पूरे होना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि निरंतर और मजबूत साझेदारी से क्या हासिल किया जा सकता है। संकल्प अपनी उल्लेखनीय स्थानीय विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता लेकर आया है, जबकि क्योर2चिल्ड्रन महत्वपूर्ण चिकित्सा ज्ञान प्रदान करता है। DKMS ने एचएलए टाइपिंग, प्रत्यारोपण, मरीज सहायता और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अपना अनुभव प्रदान किया है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा, “हम मिलकर उपचार की पूरी यात्रा के दौरान मरीजों के सामने आने वाली विभिन्न बाधाओं को दूर करने और एक टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। साझेदारी का वास्तविक अर्थ स्थानीय भागीदारों के साथ मिलकर देश में और देश के लिए दीर्घकालिक समाधान तैयार करना है।”



2015 में शुरू हुई एक महत्वपूर्ण यात्रा

संकल्प इंडिया फाउंडेशन ने वर्ष 2015 में क्योर2चिल्ड्रन के सहयोग से बेंगलुरु में अपना बाल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू किया था। इसी वर्ष DKMS के साथ भी निःशुल्क HLA टाइपिंग के माध्यम से सहयोग की शुरुआत हुई।

इसके बाद कार्यक्रम का लगातार विस्तार हुआ। DKMS ने मरीजों और उनके परिवारों को निःशुल्क HLA टाइपिंग, थैलेसीमिया प्रबंधन और प्रत्यारोपण खर्च में सहायता प्रदान की है।

संस्था ने बेंगलुरु और अहमदाबाद में बाल बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्षमता और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स को मजबूत करने में भी निवेश किया है।

साझेदारी के तहत नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण को भी बढ़ावा दिया गया है। वर्ष 2025 से यह सहयोग चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र तक भी विस्तारित हो गया है।

“हर प्रत्यारोपण एक नई शुरुआत है”

संकल्प इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष रजत कुमार अग्रवाल ने कहा कि संस्था के लिए ये 1,000 प्रत्यारोपण केवल एक संख्या नहीं, बल्कि 1,000 बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई शुरुआत हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे लिए ये 1,000 प्रत्यारोपण वास्तव में 1,000 नई शुरुआत हैं। हर बच्चे और उसके परिवार के लिए प्रत्यारोपण एक पूरी तरह अलग और उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “हमारी सोच केवल व्यक्तिगत प्रत्यारोपण करने तक सीमित नहीं थी। हमारा उद्देश्य बीमारी की रोकथाम, व्यापक थैलेसीमिया देखभाल, डोनर की पहचान और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार को एकीकृत व्यवस्था के तहत जोड़ना था।”

अग्रवाल के अनुसार, इस उपलब्धि ने यह भी साबित किया है कि सीमित संसाधनों वाले वातावरण में भी उपचार की लागत को कम रखते हुए विश्वस्तरीय प्रत्यारोपण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “DKMS और क्योर2चिल्ड्रन के साथ हमारी साझेदारी ने उपचार तक पहुंच बढ़ाने, बुनियादी ढांचे और डायग्नोस्टिक्स को मजबूत करने तथा गुणवत्ता और विशेषज्ञता में निवेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

3,000 से अधिक बच्चों की देखभाल

संकल्प इंडिया फाउंडेशन वर्तमान में 30 व्यापक थैलेसीमिया डे-केयर केंद्रों के माध्यम से 3,000 से अधिक बच्चों को उपचार और देखभाल प्रदान कर रहा है।

संस्था बेंगलुरु और अहमदाबाद में दो विशेष बाल बोन मैरो ट्रांसप्लांट केंद्र भी संचालित करती है।

बीमारी की रोकथाम के लिए इसका नेटवर्क 81 जिलों में 87 केंद्रों तक विस्तृत है। थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिन विकारों की रोकथाम के प्रयासों के तहत अब तक 2.20 लाख से अधिक दंपतियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

गुणवत्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता

इस साझेदारी ने केवल उपचार तक पहुंच का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि प्रत्यारोपण सेवाओं की गुणवत्ता को भी मजबूत किया है।

बेंगलुरु स्थित BMJH–संकल्प सेंटर फॉर पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजी एंड बीएमटी भारत का पहला ऐसा कार्यक्रम बन गया है जिसे JACIE मान्यता प्राप्त हुई है।

JACIE मान्यता को हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण और सेलुलर थेरेपी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। यह क्लिनिकल देखभाल, स्टेम सेल संग्रह एवं प्रोसेसिंग, गुणवत्ता प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा के कड़े मानकों के पालन को दर्शाती है।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत में भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली प्रत्यारोपण सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं और इसके लिए अत्यधिक महंगे या जटिल स्वास्थ्य सेवा मॉडल की आवश्यकता अनिवार्य नहीं है।

शाहिम की कहानी: उम्मीद की एक नई शुरुआत

1,000 प्रत्यारोपणों की इस उपलब्धि के पीछे सैकड़ों बच्चों और उनके परिवारों की साहस, संघर्ष और उम्मीद से भरी कहानियां हैं।

इन्हीं में से एक कहानी कर्नाटक के मोहम्मद शाहिम की है, जिन्हें मात्र पांच महीने की उम्र में गंभीर थैलेसीमिया का पता चला था।

वर्षों तक नियमित रूप से रक्त चढ़ाने के कारण उनके शरीर में अत्यधिक आयरन जमा हो गया, जिससे उनके हृदय और लिवर पर असर पड़ा और प्रत्यारोपण एक उच्च जोखिम वाली प्रक्रिया बन गई।

हालांकि, उम्मीद की एक नई किरण तब दिखाई दी जब उनकी छोटी बहन जारा को पूरी तरह HLA-मैच डोनर पाया गया।

बेंगलुरु के संकल्प–BMJH सेंटर में विस्तृत तैयारी और परामर्श के बाद परिवार ने प्रत्यारोपण कराने का निर्णय लिया।

शाहिम की मां जरीना स्वयं थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित हैं और आज भी उन्हें नियमित उपचार और रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। इसलिए वह इस बीमारी से जुड़ी चुनौतियों को व्यक्तिगत रूप से भली-भांति समझती हैं।

उन्होंने कहा, “एक मां के रूप में मेरी सबसे बड़ी इच्छा यही थी कि मेरे बेटे को थैलेसीमिया से मुक्त जीवन मिले। हम डरे हुए थे, लेकिन मेडिकल टीम ने हमें आगे बढ़ने का भरोसा दिया। आज जब मैं शाहिम को देखती हूं तो मुझे विश्वास होता है कि हमने सही फैसला लिया।”

गुणवत्ता और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

क्योर2चिल्ड्रन के संस्थापक एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ. लॉरेंस फॉल्कनर ने कहा कि गंभीर थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीक का मामला नहीं है।

उन्होंने कहा, “इसके लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित टीम, मजबूत गुणवत्ता प्रणाली और जटिल उपचार को विश्वसनीय एवं टिकाऊ तरीके से प्रदान करने की क्षमता की आवश्यकता होती है।”

उन्होंने कहा, “संकल्प के साथ हमारा सहयोग हमेशा स्थानीय विशेषज्ञता विकसित करने और किफायती लागत पर उच्च गुणवत्ता वाला प्रत्यारोपण उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहा है। DKMS के दीर्घकालिक सहयोग से यह कार्यक्रम आकार और गुणवत्ता दोनों के स्तर पर लगातार आगे बढ़ा है।”

उन्होंने कहा कि 1,000 बाल प्रत्यारोपण पूरे करना एक असाधारण उपलब्धि है, जबकि JACIE मान्यता कार्यक्रम की परिपक्वता और उच्च गुणवत्ता मानकों को दर्शाती है।

डोनर की तलाश से लेकर उपचार तक पूरी सहायता

DKMS फाउंडेशन इंडिया के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन पैट्रिक पॉल ने कहा कि किसी बच्चे के लिए उपयुक्त डोनर की पहचान इलाज की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन परिवारों को केवल डोनर खोज से कहीं अधिक सहायता की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा, “सही डोनर मिलना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन केवल यही पर्याप्त नहीं है। परिवारों को प्रत्यारोपण तक पहुंचने के लिए स्पष्ट मार्ग और उपचार के दौरान आने वाली आर्थिक एवं व्यावहारिक बाधाओं से निपटने में सहायता की जरूरत होती है।”

उन्होंने कहा, “हमारे थैलेसीमिया कार्यक्रम के माध्यम से हम निःशुल्क HLA टाइपिंग और डोनर सर्च सहायता प्रदान करते हैं। हमारा पेशेंट फाइनेंशियल असिस्टेंस प्रोग्राम पात्र परिवारों को प्रत्यारोपण और प्रत्यारोपण के बाद के खर्चों को पूरा करने में भी सहायता करता है।”

उन्होंने कहा कि संकल्प जैसे साझेदारों के साथ मिलकर इन विभिन्न प्रकार की सहायता को एक साथ जोड़ना संभव होता है, जिससे अधिक बच्चों को थैलेसीमिया से प्रभावित जीवन से संभावित इलाज की ओर आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

थैलेसीमिया-मुक्त भारत की दिशा में एक और कदम

1,000 स्टेम सेल प्रत्यारोपण पूरे करना केवल अब तक की उपलब्धियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए साझेदारी की महत्वाकांक्षा को भी दर्शाता है।

उच्च गुणवत्ता वाले उपचार को टिकाऊ रूप से उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करना और अधिक बच्चों तक संभावित रूप से जीवन बदल देने वाले उपचार की पहुंच सुनिश्चित करना इस साझेदारी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

संकल्प इंडिया फाउंडेशन के लिए यह उपलब्धि वर्ष 2047 तक “थैलेसीमिया और हीमोग्लोबिनोपैथी-मुक्त भारत” के अपने व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एक हजार बच्चे, एक हजार परिवार और एक हजार नई शुरुआत—यह उपलब्धि केवल चिकित्सा क्षेत्र का एक पड़ाव नहीं है। यह उस भविष्य की बढ़ती संभावना का प्रतीक है, जहां अधिक से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के आजीवन बोझ से मुक्त होकर स्वस्थ और बेहतर जीवन जी सकेंगे।

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